Dīkṣā-bhedaḥ (Types of Initiation) — Lalitopākhyāna: Hayagrīva–Agastya Dialogue
तुषेण बद्धो व्रीहिः स्यात्तुषाभावे तु तण्डुलः / पाशबद्धः स्मृतो जीवः पाशमुक्तो महेश्वरः
tuṣeṇa baddho vrīhiḥ syāttuṣābhāve tu taṇḍulaḥ / pāśabaddhaḥ smṛto jīvaḥ pāśamukto maheśvaraḥ
भूसी से बँधा हुआ धान कहलाता है, और भूसी न रहने पर वही चावल है। बंधन-पाश से बँधा जीव कहा गया है, और पाश से मुक्त वही महेश्वर है।