Dīkṣā-bhedaḥ (Types of Initiation) — Lalitopākhyāna: Hayagrīva–Agastya Dialogue
स्वीकुर्यात्परया भक्त्या देवी शेष कलाधिकम् / सद्य एव स शिष्यः स्यात्पङ्क्तिपावनपावनः
svīkuryātparayā bhaktyā devī śeṣa kalādhikam / sadya eva sa śiṣyaḥ syātpaṅktipāvanapāvanaḥ
देवी शेष-कलाधिक (अतिशय अनुग्रह) को परम भक्ति से स्वीकार करती हैं। वह साधक तत्काल शिष्य हो जाता है, जो पंक्ति-शुद्धि करने वालों को भी पावन करने वाला है।