Śrīcakra–Mantra–Pūjāvidhi: Agastya–Hayagrīva Saṃvāda
Lalitopākhyāna Context
दृष्ट्वा संक्षोभयेन्नारीं दृष्ट्वैव हरते विषम् / दृष्ट्वा करीति वागीशं दृष्ट्वा सर्वं विमोहयेत् / दृष्ट्वा चातुर्थिकादींश्च ज्वरान्नाशयते क्षणात्
dṛṣṭvā saṃkṣobhayennārīṃ dṛṣṭvaiva harate viṣam / dṛṣṭvā karīti vāgīśaṃ dṛṣṭvā sarvaṃ vimohayet / dṛṣṭvā cāturthikādīṃśca jvarānnāśayate kṣaṇāt
देखते ही स्त्री को उद्वेलित कर दे, देखते ही विष को हर ले; देखते ही वागीश को ‘करीति’ कर दे, देखते ही सबको मोहित कर दे; और देखते ही चातुर्थिक आदि ज्वरों को क्षण में नष्ट कर दे।