Śrī Kāmākṣī–Mahātripurasundarī: Immanence of Śakti and Cosmic Administration
Lalitopākhyāna
श्रीनाथ बहवो ऽतीताः कालानाधिगतः सुतः / संततेर्मम संतापः संततं वर्धतेतराम् / किं कुर्वे यदि संतानसंपत्स्यात्तन्निवेदय
śrīnātha bahavo 'tītāḥ kālānādhigataḥ sutaḥ / saṃtatermama saṃtāpaḥ saṃtataṃ vardhatetarām / kiṃ kurve yadi saṃtānasaṃpatsyāttannivedaya
हे श्रीनाथ! बहुत-से काल बीत गए, पर मुझे पुत्र प्राप्त नहीं हुआ। संतान के अभाव से मेरा संताप निरंतर अत्यधिक बढ़ता जाता है। मैं क्या करूँ? यदि संतान-सम्पदा प्राप्त हो सके तो वह उपाय मुझे निवेदित कीजिए।