Śrī Kāmākṣī–Mahātripurasundarī: Immanence of Śakti and Cosmic Administration
Lalitopākhyāna
निर्धूतनिखिलातङ्कः श्रीदेवीं मनसा वान् / उत्तरे सेवितुं लक्ष्म्या वासुदेवेन दक्षिणे
nirdhūtanikhilātaṅkaḥ śrīdevīṃ manasā vān / uttare sevituṃ lakṣmyā vāsudevena dakṣiṇe
समस्त भय-व्यथा को झाड़कर उसने मन से श्रीदेवी को वंदन किया—उत्तर में लक्ष्मी के साथ और दक्षिण में वासुदेव के साथ सेवा करने हेतु।