Śrī Kāmākṣī–Mahātripurasundarī: Immanence of Śakti and Cosmic Administration
Lalitopākhyāna
लीलामात्रमिदं वत्से परलोकविडंबनम् / इत्यूचिषीं महाराज्ञीमबिकां सर्वमङ्गला / भक्त्या प्रणम्य पश्यन्ती परां प्रीतिमुपाययौ
līlāmātramidaṃ vatse paralokaviḍaṃbanam / ityūciṣīṃ mahārājñīmabikāṃ sarvamaṅgalā / bhaktyā praṇamya paśyantī parāṃ prītimupāyayau
“वत्से, यह सब केवल लीला है, परलोक का मानो एक विडंबन-सा,” ऐसा कहकर सर्वमंगला अबिका ने महारानी को भक्ति से प्रणाम किया; उसे निहारती हुई वह परम प्रीति को प्राप्त हुई।