Pratisarga-pravartana (How Re-Creation Proceeds) / पुनःसर्ग-प्रवर्तन
इतिहासमिमं श्रुत्वा धर्माय विदधे मतिम् / यावन्त्यस्य शरीरेषु रोमकूपानि सर्वशः
itihāsamimaṃ śrutvā dharmāya vidadhe matim / yāvantyasya śarīreṣu romakūpāni sarvaśaḥ
इस इतिहास को सुनकर उसने धर्म के लिए अपनी बुद्धि को स्थिर किया। उसके शरीर में जितने भी रोमकूप हैं, उन सबके समान (फल होता है)।