Mantrarāja-sādhana Prakāra & Tripurā/Lalitā–Kāmākṣī Tattva
Lalitopākhyāna Context
न ब्रह्मा न च विष्णुर्वा न रुद्रश्च त्रयो ऽप्यमी / मोहिता मायया यस्यास्तुरीयस्तु स चेश्वरः / सदाशिवो न जानाति कथं प्राकृतदेवताः
na brahmā na ca viṣṇurvā na rudraśca trayo 'pyamī / mohitā māyayā yasyāsturīyastu sa ceśvaraḥ / sadāśivo na jānāti kathaṃ prākṛtadevatāḥ
न ब्रह्मा, न विष्णु, न रुद्र—ये तीनों भी जिसकी माया से मोहित हो जाते हैं; जो तुरीय है वही ईश्वर है। जब सदाशिव भी उसे नहीं जान पाते, तो साधारण देवता कैसे जानेंगे?