ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
यद्यत्कृतवती कृत्यं तत्सर्वं विनिवेदितम् / पूजाविधानमखिलं शास्त्रोक्तेनैव वर्त्मना / खण्डान्तरे वदिष्यामि तद्विलासं महाद्भुतम्
yadyatkṛtavatī kṛtyaṃ tatsarvaṃ viniveditam / pūjāvidhānamakhilaṃ śāstroktenaiva vartmanā / khaṇḍāntare vadiṣyāmi tadvilāsaṃ mahādbhutam
उसने जो-जो कृत्य किए, वे सब निवेदित कर दिए गए; पूजाविधान भी समस्त शास्त्रोक्त मार्ग से ही है। अगले खण्ड में मैं उसके महाअद्भुत विलास का वर्णन करूँगा।