ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
द्रवत्कन्दर्पसदनाः पुलकाङ्कुरभूषणाः / अन्यमाकारमिव च प्राप्ता मानसजन्मना
dravatkandarpasadanāḥ pulakāṅkurabhūṣaṇāḥ / anyamākāramiva ca prāptā mānasajanmanā
कामदेव का निवास-सा उनका हृदय पिघल उठा, रोमांच के अंकुर उनके आभूषण बन गए; और मन में उत्पन्न भाव से वे मानो दूसरा ही रूप धारण कर बैठीं।