ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
देवर्षिपितृवर्गांश्च तर्पयित्वा विधानतः / दिवाकरमुपास्थाय देवीं च रविबिम्बगाम्
devarṣipitṛvargāṃśca tarpayitvā vidhānataḥ / divākaramupāsthāya devīṃ ca ravibimbagām
विधानपूर्वक देव, ऋषि और पितृ-गणों का तर्पण करके, सूर्यदेव का उपस्थान करे और सूर्य-मण्डल में स्थित देवी की भी उपासना करे।