ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
तत्क्रमेण प्रवक्ष्यामि सावधानो मुने शृणु / प्रातरुत्थाय शिरसिस्मृत्वा कमलमुज्ज्वलम्
tatkrameṇa pravakṣyāmi sāvadhāno mune śṛṇu / prātarutthāya śirasismṛtvā kamalamujjvalam
अब मैं उसे क्रम से कहूँगा; हे मुने, सावधान होकर सुनो। प्रातः उठकर, शिर में उज्ज्वल कमल का स्मरण करे।