ललितोपाख्याने मन्त्रतारतम्यकथनम्
Hierarchy of Mantras in the Lalitopākhyāna
क्षित्या हृल्लेखया चैव प्रोक्तो हंसादिमन्त्रराट् / कामादिमन्त्रराजस्तु स्मरयोनिः श्रियो मुखे
kṣityā hṛllekhayā caiva prokto haṃsādimantrarāṭ / kāmādimantrarājastu smarayoniḥ śriyo mukhe
क्षित्या और हृल्लेखा द्वारा ‘हंस’ आदि मन्त्रराज कहा गया; तथा ‘काम’ आदि मन्त्रराज—स्मर-योनि—श्री के मुख में स्थित है।