महापद्माटव्यार्घ्यस्थापनकथनम्
Establishing the Arghya in the Mahāpadmāṭavī
चतुर्योजनविस्तारो दशयोजनमुन्नतः / यथोत्तरे ह्रासयुक्तः स्थूलतः कूबरोज्ज्वलः
caturyojanavistāro daśayojanamunnataḥ / yathottare hrāsayuktaḥ sthūlataḥ kūbarojjvalaḥ
उसका विस्तार चार योजन है और ऊँचाई दस योजन। उत्तर की ओर क्रमशः संकुचित होता हुआ, स्थूल रूप से कूबर से उज्ज्वल है॥