महापद्माटव्यार्घ्यस्थापनकथनम्
Establishing the Arghya in the Mahāpadmāṭavī
पिहिता ललिता देव्या मूतर्लोहितसिन्धुवत् / तरुणार्कसहस्राभा चन्द्रवच्छीतला ह्यपि / मुहुः प्रवाहरूपेण प्रसरन्ती महामुने
pihitā lalitā devyā mūtarlohitasindhuvat / taruṇārkasahasrābhā candravacchītalā hyapi / muhuḥ pravāharūpeṇa prasarantī mahāmune
हे महामुने! ललिता देवी ने उसे मानो पिघले हुए लाल सागर-सा आवृत कर रखा था; वह हजारों उदित सूर्य के समान दीप्त थी, फिर भी चन्द्रमा के समान शीतल; और बार-बार प्रवाह-रूप से फैलती रहती थी।