महापद्माटव्यार्घ्यस्थापनकथनम्
Establishing the Arghya in the Mahāpadmāṭavī
वल्लभो दण्डनाथायाः किरिचक्रे महारथः / एतद्रथत्रयं सर्वक्षेत्रश्रीपुरपक्तिषु / समानमेव विज्ञेयमङ्गस्था देवता यथा
vallabho daṇḍanāthāyāḥ kiricakre mahārathaḥ / etadrathatrayaṃ sarvakṣetraśrīpurapaktiṣu / samānameva vijñeyamaṅgasthā devatā yathā
दण्डनाथा का प्रिय वल्लभ, किरीचक्र में स्थित महा-रथी है। यह तीनों रथ-समूह समस्त क्षेत्र-श्रीपुर की पंक्तियों में एक-सा ही जानना चाहिए, जैसे अंगों में स्थित देवताएँ समान रूप से विराजती हैं।