दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
ललिताया जपैध्यानैः स्तोत्रैः पूजाशतैरपि / अश्विन्यादियुतस्तत्र कालं नयति चन्द्रमाः
lalitāyā japaidhyānaiḥ stotraiḥ pūjāśatairapi / aśvinyādiyutastatra kālaṃ nayati candramāḥ
वहाँ अश्विनी आदि नक्षत्रों से युक्त चन्द्रमा, ललिता के जप‑ध्यान, स्तोत्र और सैकड़ों पूजाओं के द्वारा काल का प्रवाह करता है।