दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
परितो भ्राम्यति मुने मणिनौकाधिरोहिणी / वापिका पयसागाधा पूर्ववत्परिकीर्तिता
parito bhrāmyati mune maṇinaukādhirohiṇī / vāpikā payasāgādhā pūrvavatparikīrtitā
हे मुने! मणिमय नौका पर आरूढ़ वह देवी चारों ओर विचरती हैं; और वह वापिका जल से गहन है—ऐसा पूर्ववत् वर्णित है।