दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
तत्र नौकेश्वरी देवी क्लरुकुल्लेतिविश्रुता / तमालश्यामलाकारा श्यामकञ्चुकधारिणी
tatra naukeśvarī devī klarukulletiviśrutā / tamālaśyāmalākārā śyāmakañcukadhāriṇī
वहाँ नौकेश्वरी देवी ‘क्लरुकुल्ले’ नाम से विख्यात हैं; वे तमाल-वृक्ष-सी श्यामल कांति वाली और श्याम कञ्चुक धारण करने वाली हैं।