दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
सा तत्र मणिनौकास्थशक्तिसेनासमावृता / ईषदालोकमात्रेण त्रैलोक्यमददायिनी
sā tatra maṇinaukāsthaśaktisenāsamāvṛtā / īṣadālokamātreṇa trailokyamadadāyinī
वह देवी वहाँ मणि-जटित नौका पर स्थित हैं और शक्तियों की सेना से घिरी हुई हैं। केवल हल्की-सी दृष्टि मात्र से ही वह त्रैलोक्य को मद प्रदान करने वाली हैं।