दिक्पालादि-शिवलोकान्तर-कथनम्
Account of the Dikpālas and Intervening Realms toward Śiva’s Worlds
महापद्माटवीवासा महाचक्रस्थिता अपि / मुहुर्मुहुर्नवनवं मुहुस्चाबद्धसौरभम्
mahāpadmāṭavīvāsā mahācakrasthitā api / muhurmuhurnavanavaṃ muhuscābaddhasaurabham
वह महापद्म-वन में निवास करती हुई, महाचक्र में स्थित होकर भी, बार-बार नूतन-नूतन सुगन्ध को निरन्तर प्रकट करती है।