Ṣoḍaśāvaraṇa-cakre Rudrāṇāṃ Nāma-sthāna-nirdeśa
Rudras in the Sixteen-Enclosure Chakra
इति श्रीब्रह्माण्डमहापुराणे उत्तरभागे हयग्रीवागस्त्यसंवादे ललितोपाख्याने पुष्परागप्रकारादिभुक्ताकरान्तसप्तकक्षान्तरकथनं नाम त्रयस्त्रिंशो ऽध्यायः अगस्त्य उवाच षोडशावरणं चक्रं किं तद्रुद्राधिदैवतम् / तत्र स्थिताश्च रुद्राः के केन नाम्ना प्रकीर्तिताः
iti śrībrahmāṇḍamahāpurāṇe uttarabhāge hayagrīvāgastyasaṃvāde lalitopākhyāne puṣparāgaprakārādibhuktākarāntasaptakakṣāntarakathanaṃ nāma trayastriṃśo 'dhyāyaḥ agastya uvāca ṣoḍaśāvaraṇaṃ cakraṃ kiṃ tadrudrādhidaivatam / tatra sthitāśca rudrāḥ ke kena nāmnā prakīrtitāḥ
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्डमहापुराण के उत्तरभाग में हयग्रीव–अगस्त्य संवाद के ललितोपाख्यान में ‘पुष्पराग-प्रकार आदि से भुक्ताकारान्त सप्तकक्षान्तर-कथन’ नामक तैंतीसवाँ अध्याय। अगस्त्य बोले—हे भगवन्! वह षोडशावरण चक्र किस रुद्र को अधिदेवता मानता है? वहाँ स्थित रुद्र कौन-कौन हैं और किन नामों से प्रसिद्ध हैं?