भण्डासुरवधोत्तरकृत्य-देवस्तुति
Aftermath of Bhaṇḍāsura’s Slaying and the Gods’ Hymn to Lalitā
श्रीशंभुनाथस्य महाशयस्य द्वितीयतेजः प्रसरात्मके यः / स्थाण्वाश्रमे कॢप्ततया विरक्तः सतीवियोगेन विरस्तभोगः
śrīśaṃbhunāthasya mahāśayasya dvitīyatejaḥ prasarātmake yaḥ / sthāṇvāśrame kḷptatayā viraktaḥ satīviyogena virastabhogaḥ
जो श्रीशम्भुनाथ महाशय का द्वितीय तेज बनकर प्रसारित हुआ, वह स्थाणु-आश्रम में स्थित होकर स्वभाव से विरक्त था और सती-वियोग से भोगों से दूर हो गया था।