प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
महदाद्यं विशेषान्तं सर्वैरूप्यं विलक्षणम् / विकारलक्षणं तद्वै सो ऽक्षरः क्षरमेति च
mahadādyaṃ viśeṣāntaṃ sarvairūpyaṃ vilakṣaṇam / vikāralakṣaṇaṃ tadvai so 'kṣaraḥ kṣarameti ca
महत्तत्त्व से लेकर विशेष (स्थूल भूत) तक, जो सर्वरूप होकर भी भिन्न-भिन्न प्रतीत होता है—वह विकार-लक्षण वाला है; वही ‘अक्षर’ भी क्षरभाव को प्राप्त होता है।