प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
क्षपणात्कारणाच्चैव क्षतत्राणात्तथैव च / भोज्यत्वविषयत्वाच्च क्षेत्रं क्षेत्रविदो विदुः
kṣapaṇātkāraṇāccaiva kṣatatrāṇāttathaiva ca / bhojyatvaviṣayatvācca kṣetraṃ kṣetravido viduḥ
क्षय कराने से, कारण होने से, तथा क्षति से रक्षा करने के कारण; और भोग्य तथा विषय होने से—क्षेत्रविद् इसे ‘क्षेत्र’ कहते हैं।