प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
सर्वमापूरयित्वेदं तिष्ठन्ति विचरन्ति च / अपामपि गणो यस्तु ज्योतिःष्वालीयते रसः
sarvamāpūrayitvedaṃ tiṣṭhanti vicaranti ca / apāmapi gaṇo yastu jyotiḥṣvālīyate rasaḥ
इस समस्त जगत् को भरकर आपः कहीं स्थिर रहती हैं और कहीं विचरती हैं। जलों का जो समूह-रूप रस है, वह ज्योतियों में लीन हो जाता है।