प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
लोकेषु सर्वभूतानां तन्न कार्यं विजानता / अविद्याप्रत्ययारंभा आरभ्यन्ते हि मानवैः
lokeṣu sarvabhūtānāṃ tanna kāryaṃ vijānatā / avidyāpratyayāraṃbhā ārabhyante hi mānavaiḥ
लोकों में समस्त प्राणियों के लिए वह कर्म (सत्य) जानने पर भी, मनुष्य अविद्या-जनित धारणाओं से ही कार्य आरम्भ करते हैं।