प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
तयोः प्रवर्त्तकं मध्ये इहैवावर्त्तकं रजः / इत्येवं परिवर्तन्तेत्रयश्चेतोगुणात्मकाः
tayoḥ pravarttakaṃ madhye ihaivāvarttakaṃ rajaḥ / ityevaṃ parivartantetrayaścetoguṇātmakāḥ
उन दोनों के बीच रज यहाँ प्रेरक और घुमाने वाला है। इस प्रकार चित्त के ये तीनों गुण निरंतर परिवर्तन करते रहते हैं।