प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
निरात्मके पुनस्तस्मिन्वाच्यावाच्यं न विद्यते / एतौ संहारविस्तारौ व्यक्ताव्यक्तौ ततः पुनः
nirātmake punastasminvācyāvācyaṃ na vidyate / etau saṃhāravistārau vyaktāvyaktau tataḥ punaḥ
परन्तु उस अनात्म (निर्विशेष) में वाच्य और अवाच्य का भेद नहीं रहता। फिर उससे ही संहार और विस्तार—व्यक्त और अव्यक्त—ये दोनों प्रकट होते हैं।