भण्डपुत्रशोकः (Bhaṇḍa’s Lament for His Sons) — Lalitopākhyāna Episode
कथमेवं विनिःशेषं हतायूयं दुराशयाः / अप्रधृष्यभुजासत्त्वान्भवतो मत्कुलाङ्कुरान् / कथमेकपदे दुष्टा वनिता संगरे ऽवधीत्
kathamevaṃ viniḥśeṣaṃ hatāyūyaṃ durāśayāḥ / apradhṛṣyabhujāsattvānbhavato matkulāṅkurān / kathamekapade duṣṭā vanitā saṃgare 'vadhīt
दुराशयों, तुम सब कैसे इस प्रकार निःशेष मारे गए? जिनकी भुजाओं का पराक्रम अजेय था, जो मेरे कुल के अंकुर थे—उन्हें उस दुष्टा स्त्री ने युद्ध में एक ही क्षण में कैसे मार डाला?