भण्डपुत्रशोकः (Bhaṇḍa’s Lament for His Sons) — Lalitopākhyāna Episode
अश्रूयन्त ततस्तस्य रणनिःसाणनिस्वनाः / तथापि ता निरुद्योगाः शक्तयः कटके ऽभवन्
aśrūyanta tatastasya raṇaniḥsāṇanisvanāḥ / tathāpi tā nirudyogāḥ śaktayaḥ kaṭake 'bhavan
तब उसके युद्ध-नगाड़ों और शंख-ध्वनियों का शब्द सुनाई पड़ा; फिर भी वे शक्तियाँ निष्क्रिय होकर सेना-शिविर में ही रह गईं।