भण्डपुत्रशोकः (Bhaṇḍa’s Lament for His Sons) — Lalitopākhyāna Episode
एवमेव रणारंभं विमुच्य विधुतायुधाः / शक्तयो निद्रया द्वारे घूर्णमाना इवाभवन्
evameva raṇāraṃbhaṃ vimucya vidhutāyudhāḥ / śaktayo nidrayā dvāre ghūrṇamānā ivābhavan
इस प्रकार युद्ध का आरम्भ छोड़कर, अस्त्र-शस्त्र झटक चुके वे शाक्त-वीर निद्रा से द्वार पर मानो घूमते-डोलते से हो गए।