भण्डपुत्रशोकः (Bhaṇḍa’s Lament for His Sons) — Lalitopākhyāna Episode
परितो विभ्रमञ्शालमवकाशमवाप्नुवन् / दक्षिणं द्वारमासाद्य निदध्यौ क्षणमुद्धतः
parito vibhramañśālamavakāśamavāpnuvan / dakṣiṇaṃ dvāramāsādya nidadhyau kṣaṇamuddhataḥ
वह चारों ओर उस भ्रम-शाला का अवकाश प्राप्त कर, दक्षिण द्वार पर पहुँचकर, उन्नत मन से क्षणभर ध्यानमग्न हो गया।