विषङ्गपलायनम् (Viṣaṅga-palāyanam) — Aftermath of the First Battle Day
इममेकं सहध्वं च शौर्यकीतिविपर्ययम् / इत्युक्त्वा भण्डदैत्येन्द्रस्तान्प्रहैषीद्रणं प्रति / द्विशतं चाक्षौहिणीनां तत्सहायतयाहिनोत्
imamekaṃ sahadhvaṃ ca śauryakītiviparyayam / ityuktvā bhaṇḍadaityendrastānprahaiṣīdraṇaṃ prati / dviśataṃ cākṣauhiṇīnāṃ tatsahāyatayāhinot
“इसी एक को साथ ले जाओ, जिससे शौर्य और कीर्ति का उलट हो जाए”—यह कहकर भण्ड दैत्येन्द्र ने उन्हें रण की ओर भेजा; और सहायता हेतु दो सौ अक्षौहिणी सेनाएँ भी साथ कर दीं।