विषङ्गपलायनम् (Viṣaṅga-palāyanam) — Aftermath of the First Battle Day
द्वारयोजनमात्रं तु मुक्त्वान्यत्र ज्वलत्तनुः / वह्निज्वालात्वमापन्ना संरक्ष सकलं बलम्
dvārayojanamātraṃ tu muktvānyatra jvalattanuḥ / vahnijvālātvamāpannā saṃrakṣa sakalaṃ balam
केवल द्वार के लिए दो योजन का स्थान छोड़कर, अन्यत्र देह को प्रज्वलित रखो; अग्नि-ज्वाला रूप होकर समस्त बल की रक्षा करो।