मन्वानश्च हि तामेव विषङ्गः सुदुराशयः / पृष्ठवंशे रथेन्द्रस्य घट्टयामास सैनिकैः
manvānaśca hi tāmeva viṣaṅgaḥ sudurāśayaḥ / pṛṣṭhavaṃśe rathendrasya ghaṭṭayāmāsa sainikaiḥ
विषंग नामक वह दुष्टबुद्धि, उसी को लक्ष्य मानकर, सैनिकों सहित रथराज के पृष्ठभाग पर आघात करने लगा।