अत्याप्तैर्मन्त्रिभिर्युक्तः कुटिलाक्षपुरःसरैः / ललिताविजये मन्त्रं चकार क्वथिताश्यः
atyāptairmantribhiryuktaḥ kuṭilākṣapuraḥsaraiḥ / lalitāvijaye mantraṃ cakāra kvathitāśyaḥ
अत्यन्त विश्वासपात्र मंत्रियों से, जिनके आगे कुटिलाक्ष था, युक्त होकर वह ललिता-विजय हेतु मंत्र रचने लगा; उसका मुख क्रोध से तप रहा था।