बलाहकादिसप्तसेनानायकप्रेषणम् (Dispatch of the Seven Commanders beginning with Balāhaka) / Lalitopākhyāna War Continuation
शक्तयो दैत्यशस्त्रौधैर्विद्धगात्राः सृतामृजः / सुपल्लवा रणे रेजुः कङ्कोललतिका इव
śaktayo daityaśastraudhairviddhagātrāḥ sṛtāmṛjaḥ / supallavā raṇe rejuḥ kaṅkolalatikā iva
दैत्य-शस्त्रों की वर्षा से उनके अंग बिंध गए और रक्त बह निकला। फिर भी रण में वे नवपल्लवों-सी शोभित हुईं, मानो कंकोल की लताएँ हों।