दुर्मद-कुरण्ड-वधः (The Slaying of Durmada and Kuraṇḍa) — Lalitopākhyāna Battle Continuation
शताक्षौहिणिके संख्ये ते स्वमात्रावशेषिताः / अतित्रासेन रोषेण गृहीताश्च चमूवराः / संग्राममधिकं तेनुः समाकृष्टशरासनाः
śatākṣauhiṇike saṃkhye te svamātrāvaśeṣitāḥ / atitrāsena roṣeṇa gṛhītāśca camūvarāḥ / saṃgrāmamadhikaṃ tenuḥ samākṛṣṭaśarāsanāḥ
शत-अक्षौहिणी की संख्या में वे केवल अपनी थोड़ी-सी मात्रा भर शेष रह गए। अत्यन्त भय और क्रोध से ग्रस्त वे श्रेष्ठ सेनाएँ धनुष खींचकर और भी घोर संग्राम करने लगीं।