Bhaṇḍāsurāhaṅkāra
The Mustering of the Daitya Forces and the Roar of War
दूलीभिस्तुमुलीकुर्वन्दिगन्तं धीरमानसः / शोकरोषग्रहग्रस्तो जवनाश्वगतो ययौ
dūlībhistumulīkurvandigantaṃ dhīramānasaḥ / śokaroṣagrahagrasto javanāśvagato yayau
धूलि से दिशाओं के अन्त को कोलाहलमय करता हुआ वह धीर-मन वाला, शोक और क्रोध के आवेश से ग्रस्त, वेगवान अश्व पर चढ़कर चला।