Bhaṇḍāsurāhaṅkāra
The Mustering of the Daitya Forces and the Roar of War
स कुरण्डः समागत्य प्रणाम स्वामिने ऽदिशत् / उवाच कुटिलाक्षस्तं गच्छ सज्जय सैनिकान्
sa kuraṇḍaḥ samāgatya praṇāma svāmine 'diśat / uvāca kuṭilākṣastaṃ gaccha sajjaya sainikān
तब कुरण्ड वहाँ आकर स्वामी को प्रणाम करके निवेदन करने लगा। कुटिलाक्ष ने उससे कहा— “जाओ, सैनिकों को तैयार करो।”