Bhaṇḍāsurāhaṅkāra
The Mustering of the Daitya Forces and the Roar of War
लघुहस्ततयापश्यन्नाकृष्टन्न च मोक्षणम् / ददृशे घनुषश्चक्रं केवलं शरधारणे
laghuhastatayāpaśyannākṛṣṭanna ca mokṣaṇam / dadṛśe ghanuṣaścakraṃ kevalaṃ śaradhāraṇe
उसकी फुर्तीली हस्त-चाल देखकर न तो खिंचाव दिखा, न ही छोड़ना। केवल बाण धारण करने में धनुष का चक्र-सा घूमना ही दिखाई दिया।