Bhaṇḍāsurāhaṅkāra
The Mustering of the Daitya Forces and the Roar of War
अस्मत्किङ्कर मात्रेण सुनिराशा हि साबला / तथापि राज्ञामाचारः कर्त्तव्यं पुररक्षणम्
asmatkiṅkara mātreṇa sunirāśā hi sābalā / tathāpi rājñāmācāraḥ karttavyaṃ purarakṣaṇam
हमारे एक सेवक मात्र से ही वह सेना निश्चय ही निराश हो गई; फिर भी राजाओं की मर्यादा यही है कि नगर की रक्षा अवश्य की जाए।