Bhaṇḍāsurāhaṅkāra
The Mustering of the Daitya Forces and the Roar of War
एवं पञ्चाशता कृत्वाक्षौहिण्या पुररक्षणम् / शून्यकस्य पुरस्यैव तद्वृत्तं स्वामिने ऽवदत्
evaṃ pañcāśatā kṛtvākṣauhiṇyā purarakṣaṇam / śūnyakasya purasyaiva tadvṛttaṃ svāmine 'vadat
इस प्रकार पचास अक्षौहिणी से उस नगर की रक्षा का प्रबन्ध करके, उस निर्जन नगर का समस्त वृत्तान्त उसने अपने स्वामी से कह दिया।