श्रीचक्रराजरथ—पर्वस्थदेवतानाम् प्रकाशनम्
Revelation of the Deities Stationed on the Śrīcakra-Rāja-Ratha’s Sections
मेरुमन्दरविन्ध्यानां समवाय इवाभवत् / महाघोषः प्रववृते शक्तीनां सैन्यमण्डले / चचाल वसुधा सर्वा तच्चक्ररवदारिता
merumandaravindhyānāṃ samavāya ivābhavat / mahāghoṣaḥ pravavṛte śaktīnāṃ sainyamaṇḍale / cacāla vasudhā sarvā taccakraravadāritā
वह मानो मेरु, मन्दर और विन्ध्य पर्वतों का संगम हो गया; शक्तियों की सेना-मण्डली में महान् घोष उठ पड़ा; उस चक्र-रव से विदीर्ण होकर सारी पृथ्वी काँप उठी।