श्रीचक्रराजरथ—पर्वस्थदेवतानाम् प्रकाशनम्
Revelation of the Deities Stationed on the Śrīcakra-Rāja-Ratha’s Sections
इत्थं बहुविधत्राणं पर्वस्थैर्देवतागणैः / किरिचक्रं दण्डनेत्र्या रथरत्नं चचाल ह
itthaṃ bahuvidhatrāṇaṃ parvasthairdevatāgaṇaiḥ / kiricakraṃ daṇḍanetryā ratharatnaṃ cacāla ha
इस प्रकार पर्वतों पर स्थित देवगणों ने अनेक प्रकार से रक्षा की; तब दण्डनेत्री के द्वारा किरिचक्र नामक रथ-रत्न चल पड़ा।