श्रीचक्रराजरथ—पर्वस्थदेवतानाम् प्रकाशनम्
Revelation of the Deities Stationed on the Śrīcakra-Rāja-Ratha’s Sections
रक्तस्रोतोभिरुत्कूलैः पूरयन्त्यः कपालकम् / निजभक्तद्रोहकृता मन्त्रमालाविभूषणाः
raktasrotobhirutkūlaiḥ pūrayantyaḥ kapālakam / nijabhaktadrohakṛtā mantramālāvibhūṣaṇāḥ
उफनती रक्त-धाराओं से कपाल को भरती हुई, अपने ही भक्तों से द्रोह करने वाली, मंत्र-मालाओं से विभूषित देवियाँ (प्रकट हुईं)।