श्रीचक्रराजरथ—पर्वस्थदेवतानाम् प्रकाशनम्
Revelation of the Deities Stationed on the Śrīcakra-Rāja-Ratha’s Sections
प्रावृषेण्यपयोवाहव्यूहनीलवपुर्ल्लता / किरिचक्ररथेन्द्रस्य सालङ्कारायते सदा / पोत्रिणी पुत्रिताशेषविश्वावर्तकदंबिका
prāvṛṣeṇyapayovāhavyūhanīlavapurllatā / kiricakrarathendrasya sālaṅkārāyate sadā / potriṇī putritāśeṣaviśvāvartakadaṃbikā
वर्षा-ऋतु के जल-समूह-सा नीलवर्ण देह वाली वह लता-सी शक्ति किरीचक्र-रथेन्द्र को सदा अलंकृत करती है। वह पोत्रिणी, पुत्रिता, और समस्त विश्व-चक्र को घुमाने वाली दम्बिका है।