श्रीचक्रराजरथ—पर्वस्थदेवतानाम् प्रकाशनम्
Revelation of the Deities Stationed on the Śrīcakra-Rāja-Ratha’s Sections
जयमङ्गल पद्यानि पठन्तः पटुगीतिभिः / हर्षसंफुल्लवदनाः स्फुरत्पुलकभूषणाः / मुहुर्जयजयेत्येवं स्तुवाना ललितेश्वरीम्
jayamaṅgala padyāni paṭhantaḥ paṭugītibhiḥ / harṣasaṃphullavadanāḥ sphuratpulakabhūṣaṇāḥ / muhurjayajayetyevaṃ stuvānā laliteśvarīm
वे मधुर गीतों के साथ जय-मंगल के पद्य पढ़ते, हर्ष से खिले मुख और रोमांच से सुशोभित होकर, बार-बार ‘जय, जय’ कहकर ललितेश्वरी की स्तुति करते थे।