Daṇḍanāthāviniryāṇa
The Departure/March of Daṇḍanāthā
इति प्रणम्य शिरसा धनुर्वेदेन भक्तितः / अर्पितांश्चापतूणीराञ्जग्राह प्रियकप्रिया
iti praṇamya śirasā dhanurvedena bhaktitaḥ / arpitāṃścāpatūṇīrāñjagrāha priyakapriyā
ऐसा कहकर धनुर्वेद में निपुण वह भक्तिपूर्वक सिर झुकाकर प्रणाम कर, अर्पित धनुष और तूणीरों को प्रियक की प्रिया ने ग्रहण किया।